Maha Mrityunjaya Mantra in Hindi – महामृत्युंजय मंत्र

78

Maha Mrityunjaya Mantra in Hindi | संपूर्ण महामृत्युंजय मंत्र |

महामृत्युंजय मंत्र- Maha Mrityunjaya Mantra in Hindi with its meaning.Maha Mrityunjaya Mantra Lyrics read and download the pdf-ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं….

आज हम इस पोस्ट में आपके लिए महा मृत्युंजय मंत्र को हिंदी में पेश कर रहे हैं इसमें हमने इस मंत्र को हिंदी अनुवाद में उपलबध करवाया है इसके अर्थ सहित । तथा इस मंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई इसके बारे में भी बताया है व् इस मंत्र के उच्चारण करने की सबसे सरल उत्तम विधि के बारे में भी बताया। सबसे पहले आप इस मंत्र को पढ़ सकते हैं ।यह मंत्र भगवान शिव जी का सबसे महत्वपूर्ण व् सबसे बड़ा व् प्रभावशाली मंत्र माना जाता है जिसका उल्लेख शास्त्रों के साथ साथ ऋग्वेद में भी किया गया है ।

यह मंत्र सबसे ज्यादा एक बीमार भयभीत व् कष्टों से सिमटे व्यक्ति के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त मन जाता है तथा अगर वह व्यक्ति इस मंत्र का उच्चारण सवा लाख बार करे वो इन सभी कष्टों, दुखों, व् भय से मुक्ति पा सकता है। और हम आपको बता दे की जरुरी नहीं है कि कोई अस्वस्थ व्यक्ति ही इसका उच्चारण करे बल्कि यह एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए लाभदायक होता हे एक स्वस्थ व्यक्ति भी इस मंत्र का उच्चारण कर अपने जीवन के सभी कष्टों, दुखों, व् भय तथा अकाल मृत्यु से मुक्ति पा सकता है तथा यह किसी भी व्यक्ति के जाप करने के लिए एक दम सुरक्षित है। यह मंत्र भगवान शिव से संबधित है जिसका उच्चारण कर हम शिव से अकाल मृत्यु और अपने जीवन के कष्टों व् रोगों से सुरक्षा करने की प्रार्थना करते हैं । आइये मेरे साथ यह मंत्र पढ़ें ।

Maha Mrityunjaya Mantra in Hindi Lyrics With Meaning

जरूरी सूचना – हम आपको बता दे कि मृत्युंजय मंत्र महामृत्युंजय मंत्र अलग अलग है , हालाँकि इनका मूल अर्थ एक ही है । और आप यहाँ पर सही मंत्र को देखे ।इसके हिंदी अनुवाद व् इसके सम्पूर्ण अर्थ के साथ ।

 

Maha Mrityunjaya Mantra in hind

आइये हम हम इस मंत्र के गहरे मतलब पर नज़र डालते है ( Maha Mrityunjaya Mantra in Hindi Lyrics Meaning)

ॐ का मतलब अनंत सचितानंद परभ्रम है
त्र्यम्बकं (Tryambakam) का अर्थ है तीन नेत्र वाले शिव । तीन नेत्र का अर्थ है रजो तमो सत्त्वगुण । तीन का अर्थ है स्तूल सूक्षम कारन शृस्टी का जो आधार है ह शिव हम पर प्रसन्न हो |
यजामहे – हम आपकी उपासना करते है
सुगंधिम का मतलब है आपकी खुशबु सारे जगत में फैली है हे शिव आप तो मुझ में ही मौजूद हो मेरे मुझे सभी रोगों से मुक्ति मिले मेरे सरे कष्टों का निवारण हो |
उर्वारुकमिव- मेरे रोग पल में दूर हो जाए मेरे सरे भय दूर हो जाये जैसे एक पका हुआ फल स्वयं ही टहनी से गिर जाता है तथा इसी प्रकार मेरे जितने भी कष्ट है रोग है मेरे दुःख है सभी मुझे छोड़कर मेरे से दूर चले जाएँ ।
बन्धना- मैं आज मेरे बंधनों से घिरा हूँ व् मुझे मेरे बंधनों ने त्रसित किया है और मेरे प्रभु मुझे मेरे सभी बंधनों से मुक्त करो ।
मृतयोयमुक्षीय -मुझे मृत्यु व् अकाल मृत्यु से बचाये । हे प्रभु मेरे जन्म मरण का निवारण व् मुझे निर्वाण की प्राप्ति हो ।
मामृतात – ओ प्रभु ऐसा अमृत हमें प्रदान करें इस महामृत्युंजय के जप को भावना व् आस्था के साथ करने के लिए स्वस्थ मन स्वस्थ शरीर के साथ शुद्ध आसान पर बैठें अपनी रीड की हड्डी को सीधा रखें ,लम्बी साँसे भरें और सही उच्चारण का ध्यान रखते हुए भावना और एकाग्रता से और जाप शुरू करें प्रभु शिव आपकी श्रद्धा और भक्ति उनकी तरफ देख प्रसन्न होंगे और वे आपका कल्याण करेंगे।

महामृत्युंजय मंत्र क्या है ? [ Maha Mrityunjaya Mantra in Hindi ]

(Maha Mrityunjaya Mantra in Hindi ) जैसा की हम जानते है की भगवन शिव के अनेको रूप है । तथा वैसे ही मृत्युंजय शिव जी का एक स्वरुप है जिसका शाब्दिक अर्थ है मृत्यु पर विजय – अमर। इस स्वरुप में भगवान शिव अपने भगतों व् श्रद्धालुओं की अपने हाथ में अमृत लिए उनकी सुरक्षा करते है की उन्हें किसी प्रकार का घोर कष्ट भय दुःख तथा रोग न हो। तो महा मृत्युंजयमंत्र में भगवान शिव के महा मृत्युंजयमंत्र स्वरुप से व्यक्ति की सुरक्षा की प्राथना करते है की हमे हे प्रभु शिव किसी भी हमारी कष्ट भय दुःख शारीरिक रोगों तथा अकाल मृत्यु से रक्षा करना । महा मृत्युंजयमंत्र का सामान्य तरिके से भी उच्चारण किया जाता तथा विशेष रूप से भी उच्चारण किया जाता है । इस मंत्र का भक्त निरंतर उच्चारण करके अपने जीवन को अकाल मृत्यु , घोर कष्ट , भय , दुःख , तथा शारीरिक रोगों से सुरक्षित कर सकता है । तथा हम आपको बतादे की इस मंत्र के उच्चारण से व्यक्ति अपने कुंडली दोषों को भी सुधार सकता है तो आप महा मृत्युंजयमंत्र की शक्तियों के बारे में तो अंदाजा लगा सकते हैं।

महामृत्युंजय मंत्र की उत्पति कैसे हुई ?

महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद में है इस मंत्र के विषय में यह कहते हैं कि ऋषि शुक्राचार्य ने 20 वर्षों तक एक पेड़ से उलटे लटक कर घोर तपस्या की थी और तब प्रसन्न होकर देवों के देव महादेव ने यह महा मृत्युंजय मंत्र शुक्राचार्य को दिया और इस मंत्र को संजीवनी मंत्र भी कहा जाता है और इस मंत्र के जप से मनुष्य अपने रोगों से मुक्ति प्राप्त कर सकता है समस्त भय विशेषतः मृत्यु के भय से बाहर आ सकता है ।और मनुष्य अपने जीवन को बिना भय के वयतीत कर सकता है ,जैसा की मंत्र के अर्थ से स्पष्ट होता है |

महामृत्युंजय मंत्र जपने की विधि

मंत्र जपने की सरल विधि नीचे दी गयी है :
सबसे पहले तो स्वयंअच्छे तरिके से स्नान,इत्यादि कर स्वस्थ शरीर स्वस्थ मन करें।
स्थान जहाँ पर बैठकर आप मंत्र का उच्चारण करेंगे उसे अच्छे ढंग से साफ़ कर ले ।
फिर सुखासन की मुद्रा लें या फिर आप सरल तरिके से चौकड़ी मार कर रीड की हड्डी को सीधे करके बैठें।
उसके बाद आप लम्बी साँसे भरें ,अपने मन को शांत करें ,ध्यान लगाएं और फिर सही उच्चारण का ध्यान रखते हुए भक्ति भावना और एकाग्रता और श्रद्धा से और जाप शुरू करें, और मंत्र को सम्पूर्ण जाप कर संपन्न करें ।
और भगवान् शिव आपकी भक्ति भावना श्रद्धा को देख आपका कल्याण करेंगे।

Conclusion | Maha Mrityunjaya Mantra in Hindi |

तो दोस्तों आज अपने मृत्युंजय मंत्र को हिंदी में पढ़ा उसके सम्पूर्ण अर्थ के साथ , इसके साथ – साथ अपने इस मंत्र की उत्पत्ति , इसकी जपने की विधि ,तथा यह मंत्र क्या है? इसके बारे में सम्पूर्ण रूप से पढ़ा। उम्मीद है आपको हमारी साइट पर दी गयी जानकारी अच्छी लगी होगी।
धन्यवाद

जय भोलेनाथ

यह भी देखें

Shree Hanuman Chalisa In English Lyrics PDF Download & Read

Sankat Mochan Hanuman Ashtak

Hanuman Gayatri Mantra

Bajrang Baan

 

Leave a Comment